Simone Tata: रतन टाटा के साथ विशेष संबंध रखने वाली, कौन हैं यह व्यक्ति; वह लाइमलाइट से दूर रहती हैं।

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Ratan Tata Family : सिमोन टाटा, जिनका नाम शायद आपने कभी सुना नहीं होगा, उनकी चर्चा से दूर रहती हैं। इन्होंने लैक्मे की स्थापना में भी बड़ी भूमिका निभाई है।

रतन टाटा के परिवार: टाटा परिवार में कई ऐसे छिपे हुए चेहरे हैं, जिनके बारे में आपको शायद पहले से नहीं पता हो। ये लोग न केवल लाइटलाइट से दूर रहते हैं, बल्कि उनके परिवार के व्यापार में भी अहम योगदान देते हैं, लेकिन उनके बारे में बहुत कम जानकारी होती है। आज हम एक ऐसे इंसान के बारे में बात कर रहे हैं, जिनकी कहानी को सुनकर आपको सुराहि आ सकती है।

यह इंसान कोई और नहीं बल्कि रतन टाटा की सौतेली मां हैं, जिनका नाम सिमोन टाटा है। उन्होंने “लैक्मे” के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान टाटा ग्रुप की बैकसाइड ब्रांड को स्थापित करने में भी बेहद महत्वपूर्ण रहा है। सिमोन टाटा की चर्चा मुख्य रूप से तब हुई थी, जब वे टाटा परिवार के प्रमुख सदस्य साइरस मिस्त्री की अंतिम यात्रा में शामिल हुई थीं। उस समय उन्होंने अपने परिवार के साथ एकजुट होकर दिखाया कि परिवार हमेशा एक साथ खड़ा रहता है, चाहे वो जीवन के किसी भी परिस्थिति में हो।

स्विज महिला: जब टाटा परिवार में एक नया यात्री आया

टाटा परिवार की कहानी में एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जिसमें स्विज महिला नामक एक उदाहरणात्मक व्यक्ति ने अपनी जगह बना ली है। इस व्यक्ति की कहानी ने दिखाया कि जब आपके दृढ़ इच्छा और मेहनत होती है, तो आप किसी भी समृद्ध परिवार का हिस्सा बन सकते हैं।

स्विज महिला का असली नाम सिमोन टाटा है, जो टाटा परिवार के प्रमुख श्री रतन टाटा की सौतेली मां हैं। उन्होंने टाटा ग्रुप के व्यवसाय में अपने योगदान के साथ ही एक नए संवाद की शुरुआत की है।

स्विज महिला ने लैक्मे की स्थापना में भी अपने योगदान से बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके विचारशीलता और साहस ने दिखाया कि वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।

इसके अलावा, वे रतन टाटा के साथी और सहयोगी भी बन गई हैं, जो उनके परिवार के व्यवसाय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने दिखाया कि एक समृद्ध परिवार में भी अपनी पहचान बनाने का मार्ग मिलता है, और यह उनकी मेहनत और संकल्पना का परिणाम है।

स्विज महिला की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि आत्मविश्वास, संकल्पना और मेहनत से किसी भी परिस्थिति में हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं, चाहे वो एक बड़े परिवार का हिस्सा बनना हो या किसी और क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना।

सिमोन टाटा की यात्रा: भारत के तटों से दूर, स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में एक नयी कहानी की शुरुआत होती है। 1930 में पैदा होने वाली, उन्होंने जिनेवा यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा प्राप्त की। फिर, 1953 में, जब वे भारत आईं, तब ही उनकी जीवन की एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई, नेवल एच. टाटा से। और फिर, 1955 में, उनके मिलने से उनका संवाद भारत के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया, जब उन्होंने मुंबई को अपना घर बना लिया। सिमोन नोएल टाटा, जिन्हें हम प्यार से ‘स्विज महिला’ कहते हैं, आज भी रतन टाटा की सौतेली मां बनी हुई हैं।

लैक्मे की सफलता के बाद, रिटेल सेक्टर में नए दिशानिर्देशों की तलाश में, उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया। 1996 में, उन्होंने लैक्मे को हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड (HLL) को बेच दिया और उस आय का उपयोग ट्रेंट की स्थापना के लिए किया, जो एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसके बाद, उन्होंने बेस्टसाइड ब्रांड की शुरुआत की, जिसने जल्दी ही परिवारिक नाम बनाया और डिपार्टमेंटल स्टोर खरीददारों की दिलों में जगह बनाई।

क्या करते हैं बेटा और बहू: उनके परिवार में

नोएल टाटा, उनके पुत्र का नाम, टाटा ट्रेंट के उपाध्यक्ष और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। हालांकि इनकी चर्चा कम होती है, लेकिन वे कंसाई नेरोलैक पेंट्स, टाइटन इंडस्ट्रीज, वोल्टास, और अन्य कंपनियों के डायरेक्टर भी हैं।

नोएल की पत्नी और उनकी बहू, शापूरजी, अपने पिता पलोनजी मिस्त्री की बेटी हैं और पलोनजी समूह में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखती हैं। उनके पास टाटा संस में भी महत्वपूर्ण भूमिका होने के साथ-साथ कई अन्य व्यापारिक और सामाजिक कार्यों में भी योगदान देने की शक्ति है।

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